प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, जिसे PMFBY कहा जाता है, 2016 में शुरू की गई थी। इसका मकसद यह है कि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसान को आर्थिक मदद मिले और वह अगली फसल के लिए फिर से खड़ा हो सके।

इस योजना में किसान को पूरी प्रीमियम नहीं देनी होती। खरीफ फसलों के लिए किसान बीमा रकम का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और बागवानी व वाणिज्यिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम देता है। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं।

फसल बीमा क्लेम कब किया जा सकता है?

क्लेम तब किया जाता है जब बीमा की अवधि में फसल को नुकसान पहुंचा हो। इसमें सूखा, बाढ़, ओले, भूस्खलन, कीटों का हमला और बीमारी से होने वाला नुकसान शामिल हो सकता है।

नुकसान दो तरह का हो सकता है। एक है बड़े इलाके में हुआ नुकसान, जैसे सूखा या बाढ़, जिसमें पूरे गांव या इलाके के आधार पर आकलन होता है। दूसरा है किसी एक खेत में हुआ नुकसान, जैसे ओले से किसी एक किसान की फसल खराब होना, जिसमें अलग से सर्वे होता है।

ध्यान रखें कि हर नुकसान बीमा में नहीं आता। अगर नुकसान बीमा की अवधि के बाहर हुआ है या फसल बीमा में शामिल ही नहीं थी, तो क्लेम नहीं मिलेगा। इसलिए बीमा कराते समय यह जरूर देखें कि कौन सी फसल और कौन से जोखिम इसमें शामिल हैं।

नुकसान की सूचना 72 घंटे में क्यों जरूरी है?

फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर देना सबसे जरूरी शर्त है। देर होने पर सर्वे करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि खराब फसल के निशान मिट सकते हैं या फसल काटी जा सकती है।

सूचना देने के कई तरीके हैं। किसान Crop Insurance App से सूचना दे सकता है, टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकता है, अपने बैंक या बीमा कंपनी को बता सकता है, या नजदीकी CSC केंद्र पर जाकर सूचना दर्ज करा सकता है।

सूचना देते समय यह जानकारी तैयार रखें कि नुकसान कब हुआ, किस फसल को हुआ, कितने क्षेत्र में हुआ और नुकसान की वजह क्या थी। सूचना दर्ज होने के बाद मिलने वाला नंबर या पावती संभालकर रखें, क्योंकि यही आपके क्लेम की पहली पहचान है।

  1. नुकसान होते ही खेत की तस्वीरें लें, जिनमें तारीख और जगह दिखे।
  2. 72 घंटे के अंदर Crop Insurance App, टोल फ्री नंबर 14447, बैंक या बीमा कंपनी से सूचना दें।
  3. सूचना का नंबर या पावती संभालकर रखें।
  4. सर्वे होने तक खराब फसल को बिना बताए न काटें और न हटाएं।
  5. सर्वे टीम आने पर खेत दिखाएं और मांगे गए दस्तावेज दें।

फसल बीमा क्लेम के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी सबसे पहले चाहिए, क्योंकि क्लेम का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। खाता आधार से जुड़ा होना जरूरी है।

जमीन से जुड़े दस्तावेज भी चाहिए, जैसे खसरा या खतौनी, जिससे यह साबित हो कि आप उस जमीन पर खेती करते हैं। बटाई पर खेती करने वालों के लिए अलग नियम हो सकते हैं, इसलिए बीमा कराते समय ही यह बात साफ कर लेनी चाहिए।

बुवाई का प्रमाण भी मांगा जा सकता है, जैसे पटवारी की रिपोर्ट या बुवाई से जुड़ा रिकॉर्ड। बीमा कराने की रसीद या पॉलिसी की कॉपी भी संभालकर रखें, क्योंकि इसमें बीमा कंपनी, फसल और बीमा रकम की जानकारी होती है।

फसल बीमा क्लेम के लिए आमतौर पर मांगे जाने वाले दस्तावेज
दस्तावेजक्यों चाहिए
आधार कार्डपहचान और खाते से जोड़ने के लिए
बैंक खाते की जानकारीक्लेम का पैसा सीधे खाते में भेजने के लिए
खसरा या खतौनीजमीन और खेती का प्रमाण देने के लिए
बुवाई का प्रमाणयह दिखाने के लिए कि फसल बोई गई थी
बीमा रसीद या पॉलिसीबीमा कंपनी, फसल और बीमा रकम जानने के लिए
नुकसान की तस्वीरेंसर्वे में नुकसान समझने में मदद के लिए

क्लेम का सर्वे और आकलन कैसे होता है?

सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी सर्वे के लिए टीम भेजती है। बड़े इलाके के नुकसान में उपज के आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर आकलन होता है, जबकि किसी एक खेत के नुकसान में टीम खेत पर जाकर नुकसान देखती है।

सर्वे के दौरान किसान का खेत पर मौजूद रहना मददगार होता है, क्योंकि वह बता सकता है कि नुकसान कहां और कितना हुआ। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही क्लेम की रकम तय होती है।

कभी कभी आकलन में समय लगता है, खासकर तब जब नुकसान बड़े इलाके में हुआ हो और उपज के आंकड़े आने में देर हो। इस दौरान किसान को धैर्य रखना चाहिए और अपनी सूचना का नंबर संभालकर रखना चाहिए।

क्लेम का पैसा कब और कैसे मिलता है?

क्लेम मंजूर होने के बाद पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। यह पैसा DBT के जरिए आता है, यानी बीच में किसी को नकद पैसा नहीं दिया जाता।

पैसा मिलने में कितना समय लगेगा, यह नुकसान के प्रकार और आकलन की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। किसी एक खेत के नुकसान में यह जल्दी हो सकता है, जबकि बड़े इलाके के नुकसान में उपज के आंकड़े आने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

अगर पैसा देर से मिल रहा है, तो किसान अपनी सूचना के नंबर के साथ बैंक, बीमा कंपनी या टोल फ्री नंबर 14447 पर स्थिति पूछ सकता है। लिखित में पूछताछ करने पर जवाब का रिकॉर्ड भी रहता है।

क्लेम खारिज होने से बचने के लिए क्या ध्यान रखें?

सबसे बड़ी गलती है देर से सूचना देना। 72 घंटे की सीमा निकल जाने पर क्लेम मुश्किल हो जाता है, इसलिए नुकसान होते ही सूचना दें।

दूसरी गलती है गलत जानकारी देना। फसल, क्षेत्र और नुकसान की जानकारी वही दें जो सच है, क्योंकि सर्वे में गलत जानकारी पकड़ी जा सकती है।

तीसरी गलती है दस्तावेज न संभालना। बीमा रसीद, सूचना का नंबर, खसरा और बैंक खाते की जानकारी एक जगह सुरक्षित रखें।

चौथी गलती है किसी बिचौलिए को पैसे देना। क्लेम की प्रक्रिया के लिए किसी एजेंट को अलग से पैसे देने की जरूरत नहीं है। अगर कोई पैसे मांगे, तो इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर पर की जा सकती है।

फसल बीमा कराते समय किन बातों की जांच करें?

बीमा कराते समय यह देखें कि आपकी फसल योजना में शामिल है या नहीं, बीमा की अवधि क्या है और बीमा रकम कितनी है। कम बीमा रकम होने पर नुकसान होने पर भी मदद कम मिलेगी।

यह भी देखें कि प्रीमियम कितना कटा है और बैंक खाते से कटौती की रसीद मिली है या नहीं। कई बार किसान को पता ही नहीं चलता कि बीमा हुआ है या नहीं, इसलिए रसीद लेना जरूरी है।

अगर आपने बैंक से लोन लिया है, तो पूछें कि बीमा अपने आप हुआ है या अलग से कराना है। 2020 में योजना में बदलाव के बाद यह सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है, इसलिए अपनी स्थिति साफ कर लें।

Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है और इसे financial advice नहीं समझा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियम, प्रीमियम दर और प्रक्रिया समय के साथ बदल सकते हैं और राज्य के हिसाब से अलग हो सकते हैं। क्लेम करने से पहले pmfby.gov.in पर मौजूदा नियम जरूर देखें या टोल फ्री नंबर 14447 पर जानकारी लें।

Frequently Asked Questions

फसल बीमा क्लेम कैसे करें?

नुकसान होने के 72 घंटे के अंदर Crop Insurance App, टोल फ्री नंबर 14447, बैंक या बीमा कंपनी के जरिए सूचना दें। इसके बाद सर्वे होगा और मंजूरी मिलने पर पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा।

फसल के नुकसान की सूचना कितने समय में देनी होती है?

72 घंटे के अंदर सूचना देना जरूरी है। देर होने पर सर्वे मुश्किल हो जाता है और क्लेम में दिक्कत आ सकती है।

PMFBY में किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

खरीफ फसलों के लिए बीमा रकम का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और बागवानी व वाणिज्यिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसान देता है। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार देती हैं।

फसल बीमा क्लेम के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, खसरा या खतौनी, बुवाई का प्रमाण, बीमा रसीद और नुकसान की तस्वीरें आमतौर पर मांगी जाती हैं।

क्लेम का पैसा कैसे मिलता है?

क्लेम मंजूर होने के बाद पैसा DBT के जरिए सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। नकद पैसा नहीं दिया जाता।

क्लेम खारिज होने की सबसे आम वजह क्या है?

सबसे आम वजह देर से सूचना देना है। इसके अलावा गलत जानकारी, अधूरे दस्तावेज और बीमा अवधि के बाहर हुआ नुकसान भी क्लेम खारिज होने की वजह बन सकते हैं।

Sources

  1. Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (pmfby.gov.in)
  2. Ministry of Agriculture and Farmers Welfare

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